कैसे जानें कि आपको डायबिटीज़ टाइप 1 है या टाइप 2? इसका पता कुछ लैब टेस्ट्स से करवाकर लगाया जा सकता है। वैसे तो लगभग 90% मामलों में टाइप 2 डायबिटीज़ होती है, जिसमें आपके शरीर में ज़रूरत से ज़्यादा इंसुलिन बनता है, लेकिन आपके सेल्स उस इंसुलिन का सही उपयोग नहीं कर पाते। इसे इंसुलिन रेज़िस्टेंस कहा जाता है।
लेकिन सिर्फ लक्षणों से या अंदाज़े से यह तय नहीं किया जा सकता कि किस प्रकार की डायबिटीज़ है। इसके लिए कुछ विशेष टेस्ट्स की ज़रूरत होती है। नीचे कुछ टेस्ट्स दिए गए हैं, जिन्हें आप अपने डॉक्टर से सलाह लेकर करवा सकते हैं
1. Fasting Insulin Test
क्या है: खाली पेट (8–12 घंटे उपवास) खून में इंसुलिन का स्तर मापा जाता है।
क्यों किया जाता है:
- यह देखने के लिए कि शरीर पर्याप्त इंसुलिन बना रहा है या ज़्यादा/कम बना रहा है।
परिणाम:
- कम इंसुलिन: टाइप 1 डायबिटीज़, एडवांस टाइप 2 डायबिटीज़ या इंसुलिन की कमी।
- ज़्यादा इंसुलिन: शरीर में इंसुलिन रेज़िस्टेंस (शुगर कंट्रोल करने के लिए शरीर ज़्यादा इंसुलिन बनाता है)। यह मोटापे, शुरुआती टाइप 2 डायबिटीज़, मेटाबोलिक सिंड्रोम, PCOS में दिखता है।
सामान्य रेंज: लगभग 2 – 25 µIU/ml (लैब के हिसाब से थोड़ा बदल सकता है)।
व्याख्या:
- <2 µIU/ml → पैनक्रियाज़ से इंसुलिन कम बन रहा (संभावित टाइप 1 डायबिटीज़ या एडवांस टाइप 2)।
- >25 µIU/ml → शरीर ज़्यादा इंसुलिन बना रहा है → इंसुलिन रेज़िस्टेंस।
2. HOMA-IR (Homeostatic Model Assessment for Insulin Resistance)
- क्या है: एक फ़ॉर्मूला, जिसमें फास्टिंग शुगर और फास्टिंग इंसुलिन लेकर इंसुलिन रेज़िस्टेंस का अनुमान लगाया जाता है।
- फ़ॉर्मूला: HOMA-IR=Fasting Insulin (µU/ml)×Fasting Glucose (mg/dl)405\text{HOMA-IR} = \frac{\text{Fasting Insulin (µU/ml)} \times \text{Fasting Glucose (mg/dl)}}{405}HOMA-IR=405Fasting Insulin (µU/ml)×Fasting Glucose (mg/dl)
- क्यों किया जाता है: यह देखने के लिए कि शरीर इंसुलिन को कितना प्रभावी ढंग से इस्तेमाल कर रहा है।
- परिणाम:
- <2.0 → सामान्य
- 2.0–2.5 → हल्का इंसुलिन रेज़िस्टेंस
- >2.5–3.0 → महत्वपूर्ण इंसुलिन रेज़िस्टेंस
(कट-ऑफ अलग-अलग लैब या पॉपुलेशन पर थोड़ा बदल सकता है।)
3. C-Peptide टेस्ट
क्या है: जब पैनक्रियाज़ इंसुलिन बनाता है तो उसी समय बराबर मात्रा में C-Peptide भी निकलता है।
क्यों किया जाता है:
- यह देखने के लिए कि पैनक्रियाज़ कितना इंसुलिन बना रहा है।
- टाइप 1 और टाइप 2 डायबिटीज़ में फर्क करने में मदद करता है।
परिणाम:
- कम C-Peptide: पैनक्रियाज़ इंसुलिन नहीं बना रहा → टाइप 1 डायबिटीज़ या एडवांस टाइप 2 डायबिटीज़।
- नॉर्मल/ज़्यादा C-Peptide: पैनक्रियाज़ इंसुलिन बना रहा है, लेकिन शरीर उसे ठीक से इस्तेमाल नहीं कर पा रहा → टाइप 2 डायबिटीज़, मोटापा, इंसुलिन रेज़िस्टेंस।
- बहुत ज़्यादा C-Peptide: कभी-कभी इंसुलिनोमा (ट्यूमर) जैसी स्थिति में।
सामान्य रेंज (फास्टिंग): लगभग 0.5 – 2.0 ng/ml
व्याख्या:
- कम (<0.5 ng/ml): पैनक्रियाज़ इंसुलिन नहीं बना रहा → टाइप 1 डायबिटीज़ या एडवांस टाइप 2।
- नॉर्मल/थोड़ा ज़्यादा (0.5 – 2.0 ng/ml): पैनक्रियाज़ ठीक से काम कर रहा।
- ज़्यादा (>2.0 – 3.0 ng/ml): इंसुलिन रेज़िस्टेंस (शरीर इंसुलिन ज़्यादा बना रहा), या कभी-कभी इंसुलिनोमा (ट्यूमर)।
HbA1c टेस्ट
HbA1c टेस्ट क्या है?
- यह टेस्ट आपके पिछले 2–3 महीनों का औसत ब्लड शुगर बताता है।
- जब खून में ग्लूकोज़ ज़्यादा रहता है, तो वह हीमोग्लोबिन (लाल रक्त कोशिकाओं में पाया जाने वाला प्रोटीन) से चिपक जाता है।
- HbA1c उसी “चिपके हुए शुगर” का प्रतिशत बताता है।
क्यों किया जाता है?
- डायबिटीज़ की पहचान (Diagnosis) करने के लिए।
- डायबिटीज़ कंट्रोल चेक करने के लिए (Monitoring)।
- शुगर केवल एक दिन की नहीं बल्कि लंबे समय का औसत जानने के लिए।
| HbA1c (%) | मतलब |
|---|---|
| <5.7% | नॉर्मल (डायबिटीज़ नहीं) |
| 5.7 – 6.4% | प्री-डायबिटीज़ (भविष्य में डायबिटीज़ का रिस्क) |
| ≥ 6.5% | डायबिटीज़ (पॉज़िटिव) |
| 7% से कम | डायबिटीज़ पेशेंट के लिए अच्छा कंट्रोल |
| >8% | खराब कंट्रोल (जटिलताओं का खतरा) |
HbA1c को ग्लूकोज़ में बदलना
डॉक्टर कभी-कभी HbA1c को “Estimated Average Glucose (eAG)” में बदलते हैं ताकि मरीज़ को समझना आसान हो: eAG(mg/dl)=(28.7×HbA1c)−46.7eAG (mg/dl) = (28.7 \times HbA1c) – 46.7eAG(mg/dl)=(28.7×HbA1c)−46.7
उदाहरण:
- अगर HbA1c = 7% → eAG ≈ 154 mg/dl (मतलब औसतन आपकी शुगर 154 रहती है)।
HbA1c संक्षेप में:
- HbA1c <5.7% → नॉर्मल
- 5.7–6.4% → प्री-डायबिटीज़ (सावधान रहने की ज़रूरत)
- ≥6.5% → डायबिटीज़
- डायबिटीज़ वाले व्यक्ति के लिए: HbA1c को 7% से कम रखना सबसे अच्छा माना जाता है।
संक्षेप में:
- फास्टिंग इंसुलिन → खून में इंसुलिन का स्तर बताता है।
- HOMA-IR → इंसुलिन रेज़िस्टेंस है या नहीं, यह बताता है।
- C-Peptide → पैनक्रियाज़ कितना इंसुलिन बना रहा है, यह दिखाता है।
ये तीनों टेस्ट मिलकर यह समझने में मदद करते हैं कि समस्या इंसुलिन रेज़िस्टेंस की है, इंसुलिन की कमी की है, या दोनों की।





