मेरा डायबिटीज रिवर्सल का अनुभव

मेरा डायबिटीज रिवर्सल का अनुभव

मैं एक टेक्निकल आदमी हूं और ऑफिस के काम का बहुत तनाव रहता था। डायबिटीज का जो मुझे अनुभव हुआ, वो कुछ इस तरह से था कि मुझे खाने के बाद भी बहुत ज्यादा भूख लगती थी और रात में 2-3 बार पेशाब के लिए उठता था। एक बार रात को 2 बजे, फिर 4-5 बजे, और फिर बार-बार। मुझे ये आदतें इतनी सामान्य लगीं कि मैंने कभी ध्यान नहीं दिया। ऑफिस में भी, हर एक घंटे में मुझे पेशाब के लिए जाना पड़ता था। मुझे नहीं पता था कि ये सब डायबिटीज के लक्षण हो सकते हैं। एक दिन अचानक मेरी पत्नी ने मुझे सुबह जल्दी टेस्ट कराने के लिए कहा।

मेरे खाली पेट का टेस्ट और खाना खाने के बाद का टेस्ट किया गया। रिपोर्ट्स जब आईं, तो मुझे बहुत शॉक लगा। मेरे खाली पेट का शुगर लेवल 180 था और खाना खाने के बाद 280। मुझे विश्वास ही नहीं हो रहा था कि ये मेरे साथ हो सकता है, लेकिन रिपोर्ट्स तो रिपोर्ट्स हैं। अब मैं डायबिटिक था।

आइए, आपको बताता हूं कि मेरी पुरानी आदतें क्या थीं। मैं सुबह 8:30 से 9 बजे के बीच उठता था और रात को 2 बजे या कभी-कभी 5 बजे तक सोता था। लंच स्किप करता था, भारी नाश्ता और डिनर करता था। ऑफिस में घंटों बैठकर काम करता था और स्ट्रेस बहुत रहता था, लेकिन मुझे कभी नहीं लगा कि डायबिटीज मेरे साथ हो सकता है।

मेरी माँ भी डायबिटीज़ से पीड़ित थीं और उनकी किडनियाँ फेल हो गईं थीं क्योंकि उन्होंने ज्यादा दवाइयाँ ली थीं। अब यह मेरी बारी थी। मैंने अपनी माँ को डायबिटीज़ और किडनी की तकलीफों से जूझते देखा था। डॉक्टर सिर्फ दवाइयाँ लिखते थे और आपको अस्पताल में भर्ती कर देते थे, जैसे वे बिजनेसमैन हों। भारी दवाइयाँ लेने के बाद मेरी माँ का निधन डायलिसिस के दौरान हुआ, और उनकी तकलीफों का ख्याल आज भी मेरी यादों में है।

इससे मैं बहुत निराश हो गया था, लेकिन मैंने यह निर्णय लिया कि दवाइयाँ शुरू करने से पहले कुछ रिसर्च करूंगा।

मैंने अपनी जीवनशैली को बदलने का निर्णय लिया।

एक हफ्ते बाद फिर से टेस्ट कराया और पाया कि मेरा शुगर खाली पेट 110 और खाने के बाद 148 हो गया था। फिर मैंने HbA1c टेस्ट कराया, जो 8.2 आया, जो काफी हाई था। लेकिन शुगर अब कंट्रोल में था और पेशाब की समस्या भी ठीक हो गई थी।

मेरे दिन की शुरुआत:

मैंने दिन की शुरुआत सुबह 5 बजे से की। इस समय को मैंने अपनी दवाइयों के जैसे इस्तेमाल किया। दो गिलास पानी पीने के बाद फ्रेश होकर हल्का-फुल्का वर्कआउट करने लगा – जैसे दौड़ना और स्ट्रेचिंग करना। मैंने पाया कि मेरे शरीर का मिडल पार्ट जैसे गर्दन, छाती, पेट और बट्स टाइट हो गए थे। अब मुझे समझ में आया कि शुगर इन हिस्सों में फैल गया था, और इसे ठीक करने के लिए मुझे रोज़ एक्सरसाइज करनी होगी।

ब्रेकफास्ट और डाइट:

एक्सरसाइज के बाद, मैं घर वापस आता और नहाता। फिर नाश्ते में मैंने सीजनल फ्रूट्स खाना शुरू किया – 3 से 4 तरह के फल। दोपहर 12 बजे तक सिर्फ फल खाते थे। फल पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं, और इन्हें खाने से शुगर का कोई खतरा नहीं होता है।

लंच:

12:30 बजे लंच करता था। लंच में मैं दो प्लेट्स खाता था। पहली प्लेट में कच्ची सब्जियाँ जैसे खीरा, गाजर, चुकंदर, और कुछ हरी पत्तियाँ होतीं। अगर आपका वजन 70 किलो है, तो 70×5 ग्राम = 350 ग्राम कच्ची सब्जियाँ लें। अगर वजन 90 किलो है, तो 90×5 ग्राम = 450 ग्राम। फिर प्लेट 2 में चावल, दाल और घर का खाना खाता था। खाने के बाद, 10 मिनट का वॉक और 2-3 मिनट सीढ़ियाँ चढ़ता था।

डिनर:

शाम 6 बजे डिनर करता था, उसी तरीके से – पहली प्लेट में कच्ची सब्जियाँ और दूसरी प्लेट में घर का खाना। ऑफिस में दो टिफिन लेकर जाता था और दो टाइम का खाना खाता था।

स्नैकिंग:

लंच और डिनर के बीच में कभी-कभी मुट्ठी भर मेवे खाता था, लेकिन ज्यादा खाना अवॉयड करता था।

क्या खाना है और क्या नहीं:

  • 6 बजे के बाद खाना बंद कर देना चाहिए।

  • खाने का समय 12 बजे से लेकर 6 बजे तक होना चाहिए।

क्या अवॉयड करें?

  1. डेरी प्रोडक्ट्स

  2. एनिमल प्रोडक्ट्स

  3. पैक्ड फूड

  4. सप्लीमेंट्स

सोने का समय:

मैं रात को 10 बजे या 10:30 बजे सोने चला जाता था क्योंकि रात 10 बजे के बाद शरीर अंगों को साफ करना शुरू करता है।

मेरे एक महीने के बाद के टेस्ट रिजल्ट्स:

एक महीने बाद फिर से टेस्ट कराया और नतीजे शानदार थे! मेरे शुगर का लेवल फास्टिंग 112 और खाने के बाद 138 हो गया था। HbA1c 5.7 था, जो बिल्कुल नॉर्मल था।

अगर आप भी इस प्रक्रिया को अपनाते हैं, तो सिर्फ दो महीने में आप भी अपने शुगर लेवल को कंट्रोल कर सकते हैं। ये फ्री है, बस तीन दिन ट्राई करें और खुद देखें।

अगर आपको मदद चाहिए या मेरी वर्तमान स्थिति के बारे में जानना है, तो मुझे मैसेज जरूर करें।